आनंद मठ- Anand Math
आनंद मठ- Anand Math
आनंद मठ’ बँगला के सुप्रसिद्ध लेखक बंकिमचंद्र चटर्जी की अनुपम कृति है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में इसे स्वतंत्रता सेनानियों की ‘गीता’ कहा जाता था। इसके ‘वंदे मातरम्’ गीत ने भारतीयों में स्वाधीनता की अलख जगाई, जिसको गाते हुए हजारों रणबांकुरों ने लाठी-गोलियाँ खाईं और फाँसी के फंदों पर झूल गए। देशभक्ति का जज्बा पैदा करनेवाला अत्यंत रोमांचक, हृदयस्पर्शी व मार्मिक उपन्यास ।
मोपला कांड अर्थात मुझे उससे क्या moplah kand arth
मोपला कांड अर्थात मुझे उससे क्या moplah kand arth
स्वातंत्र्यवीर सावरकर की यह पुस्तक मोपलाओं द्वारा किए गए हिंदुओं के उस नृशंस एवं जघन्य नरसंहार का सजीव चित्रण है, जो हर हिंदू के मन और आत्मा को झकझोरकर रख देगी। अगर अभी भी हिंदू समाज नहीं चेता तो 1921 की वीभत्स स्थिति की पुनरावृत्ति हो सकती है।
जनजातीय योद्धा Janjatiya yodha
जनजातीय योद्धा Janjatiya yodha
संस्कृति , स्वाभिमान, परंपरा और ‘स्वायत्तता की रक्षा के लिए जितना बलिदान, जितना संघर्ष भारत में जनजातियों का रहा है, वैसा उदाहरण विश्व में कहीं और नहीं मिलता। भारत में प्रत्येक विदेशी आक्रमण के विरुद्ध जनजातियों ने सबसे पहले संघर्ष किया और शस्त्र उठाए हैं। यह संघर्ष दोनों प्रकार का हुआ- राज्य सत्ताओं की कमान में सैन्य शक्ति के रूप में स्वतंत्र संघर्ष और बलिदान के रूप में। यदि विदेशी आक्रांताओं के छल-बल से देशी सत्ताएँ पराभूत हुईं तो जनजातियों ने इन राजपरिवारों के सदस्यों को वन में छिपाकर अपने प्राणों की आहुतियाँ दीं।
परिवार प्रबोधन parivaar prabodhan
हिन्दू संस्कृति सनातन है। सनातन का अर्थ है ‘शाश्वत’। वह चिर पुरातन होते हुए नित्य नूतन भी है। अपनी संस्कृति के इस अनोखे सामर्थ्य के अनेक कारण हैं। उन कारणों में से एक है हमारा हिन्दू परिवार, हमारी हिन्दू कुटुम्ब व्यवस्था। हिन्दू परिवार में भौतिक अवश्यकताएँ पूर्ण होती हैं, परस्पर सम्बन्ध दृढ़ होता रहता है। इसके साथ-साथ एक व्यक्ति को जो करना ही है, ऐसे ‘पुण्य’ विषयों के बारे में श्रद्धा निर्माण होती है और जो नहीं करना है, ऐसे ‘पाप’ विषयों के बारे में भी बोध होता है। इस कारण व्यक्ति सक्षम बनकर समाज को शक्ति प्रदान करता है।
महान भारतीय महिलाएं
महान भारतीय महिलाएं
अनादिकाल से हम नारी को सर्वोच्च स्थान पर प्रस्थापित करते आ रहे हैं क्योंकि वह तेजोमय है, धीरोदात है और सृष्टिक्रम की नायिका है तथा जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी अपना विवेक नहीं खोया !अशोक वाटिका में रावण द्वारा प्रपीड़ित किए जाने पर भगवती सीता कहती हैं कि ‘रावण, तुझे मैं अपने तेज से भस्म कर सकती है किन्तु तेरा वध तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् राम ही करेंगे।’ इसी प्रकार से द्रोपदी दुःशासन को संबोधित करते हुए कहती है कि ‘बताओ महाराज युधिष्ठिर ने मुझे स्वयं हारने के बाद दाँव पर लगाया या पहले! स्वयं हारने के बाद मुझे दाँव पर लगाने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।’ इसी प्रकार, राजस्थानी वीरांगना कहती है कि भल्ला हुआ जो मारिया बहिणी म्हारा कंत” अर्थात् यह अच्छा हुआ जो मेरे पति युद्धक्षेत्र में मारे गए अन्यथा लज्जा के मारे अपनी सखियों को मैं अपना मुंह न दिखा पाती।’
शाखा सुरभि
हमारी प्रार्थना और प्रतिज्ञा
हमारी प्रार्थना और प्रतिज्ञा
हिन्दू प्रतिभा के दर्शन
राष्ट्र पुरुष बाबा साहेब अंबेडकर
डॉ. अम्बेडकर सशक्त, निर्भीक एवं साहसी व्यक्तित्व के साथ-साथ गम्भीर समीक्षक, मौलिक चिन्तक और तेजस्वी वक्ता भी थे। उनका विषद् अध्ययन था। पीड़ित बन्धुओं की आँखों को देखकर उनका मन दुःखी हो उठा। अपनी सुख-सुविधा को छोड़ कर जीवन भर उपेक्षित बन्धुओं के अधिकारों के लिये संघर्ष करते रहे। उपेक्षा और तिरस्कार के बावजूद समाज को छोड़ने अथवा तोड़ने का विचार कभी भी नहीं आया। आदि से अन्त तक प्रखर देशभक्ति का ही परिचय दिया। उन्होंने अपने व्यक्तित्व को हिंसा तथा आतंकवाद के साथ कभी नहीं जोड़ा। कानून की सीमाओं के अन्तर्गत हो वह सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक परिवर्तन के समर्थक थे।
हिन्दू राष्ट्र क्यों
काशी तमिलगम – एक पारंपरिक संबंद
यह पुस्तक लोगों को उन संबंधों के साथ प्रस्तुत करने का एक प्रयास है जो उनके विचारों को एक उच्च तल पर ले जाएंगे, उन्हें प्रेरित करेंगे और उन्हें एक अच्छी तरह से जुड़े हुए, पूर्ण भारतीय, एक सच्चे भारतीय के रूप में अधिक ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
सौराष्ट्र तमिलगम – सहस्राब्दियों से संबंध
तमिलगम की परतों में एक अद्भुत सौराष्ट्रिय समुदाय है। एक रेशम बुनने वाला समुदाय, जिसने स्वयं …
इंडिया अर्थात भारत India Arthat Bharat
इंडिया अर्थात भारत India Arthat Bharat
ये पुस्तक “India, That Is Bharat” का हिन्दू अनुवाद है ।
स्वतंत्रता के सोपान swatantrata ke sopaan
स्वतंत्रता के सोपान swatantrata ke sopaan
माँ भारती के लिए हजारों-लाखों सपूतों का जीवन होम हो जाता है। आध्यात्मिक, राजनीतिक, समाज को संगठित करने वाले, सुधारने वाले आंदोलन और इनके अग्रणी व्यक्ति अलग-अलग हैं परंतु सबकी अलख, सब आवाज, सबका लक्ष्य, सबकी निष्ठा एक ही है, उस ‘स्व’ की प्राप्ति ! उस की पुनर्प्रतिष्ठापना ! हर प्रयास, हर उत्सर्ग में यह चाह हर बार दिखाई देती है।
विभाजन : टीस और सीख Vibhajan tees aur seekh
विभाजन : टीस और सीख Vibhajan tees aur seekh
भारत विभाजन की गाथा की तरह यह पुस्तक भी क्रमिक ढंग से ही आकार लेती गई। भारत विभाजन की गाथा के कई आयाम हैं- असंख्य जीवन की हानि, भूगोल की हानि, संस्कृति की हानि, जातिगत विनाश, राजनीतिक पक्ष और सबसे बढ़कर उसे ढाँपने- छिपाने और यहां तक कि उचित ठहराने के प्रयास त्रासदी बहुआयामी है और पीड़ा को देखने, समझने, बताने के भी अनेक आयाम हो सकते हैं। यह पुस्तक यथा शक्ति आयामों को देखती, परखती और इन्हें गूंथते हुए आगे बढ़ती है।
जंगल सत्याग्रह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ Jungle Satyagraha aur RSS
स्वतंत्रता कब और कैसे मिलेगी यह प्रश्न जब सर्वत्र पूछा जा रहा हो तब ‘हम पराधीन क्यों हुए और हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण कैसे रहे’ इस प्रश्न का न केवल मूलभूत चिंतन, अपितु इसके उत्तर हेतु भी डा. हेडगेवार जी ने प्रयास आरंभ कर दिए थे। डा. हेडगेवार ने हमेशा ‘नैमित्तिक’ आंदोलनात्मक कार्य तथा राष्ट्र निर्माण के ‘नित्य’ कार्य को महत्व दिया। इस प्रकार के आंदोलन करने की आवश्यकता ही न पड़े ऐसी परिस्थिति निर्माण करना ही वास्तव में डाक्टरजी का दीर्घकालिक उद्देश्य था।
भारत में शिक्षा की राजनीति Bharat mein shiksha ke rajneeti
हिन्दू संगठक वीर सावरकर Hindu Sanghatak Veer Savarkar
हिन्दू संगठक वीर सावरकर Hindu Sanghatak Veer Savarkar
सावरकर जी के हिन्दू संगठक पहलु पर प्रकाश डालती यह पुस्तक कई बातों का खुलासा करने जा रही है | अंडमान में किया गया हिन्दू संगठन, रत्नागिरी में छुआछूत निर्मूलन, हिन्दुओं को सेना में भर्ती होने की आग्रही भूमिका का मुख्य कारण आदि कई विषयों का विस्तार पूर्वक विवेचन इस पुस्तक में किया गया है |
पृष्ठ संख्या – 192
विषैला वामपंथ Vishaila Vampanth
डॉ राजीव ने सही लिखा है कि ‘विषैला वामपंथ’ कहीं से भी विद्वत्ता से भरा नहीं है लिहाजा, आम आदमी को वामपंथ और वामपंथी कया होते हैं, यह बिलकुल आम आदमी की बोल चाल की भाषा में ही समझाया हे उन्होंने लेकिन फिर भी, लेखक की मेहनत दिख जाती है, जिस तरह की जानकारी जुटाकर उन्होंने इतने सरल तरीके से पेश किया है, आम आदमी शायद न समझे लेकिन पत्रकारिता में जिसके बाल सफेद हुए हैं, ऐसे मेरे जेसे अनुभवी पत्रकार के लिए तो यह सरल सी भाषा में लिखी गयी पुस्तक एक दस्तावेज से कम नहीं।
गौरक्षा संग्राम : Gauraksha Sangram
गौरक्षा संग्राम : Gauraksha Sangram
गाय हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है | गाय माता का स्वरुप है जो अपने पुत्रों को अपना सब कुछ दे-देती है | लेकिन आज धन लोलुप हिन्दू संस्कृति के शत्रु गौमाता एवं गोवंश के शत्रु बन बैठे हैं | पूरा देश इन शत्रुओं के विरूद्ध गौमाता की रक्षा के लिए खड़ा है | इस संग्राम पर प्रकाश डालती यह पुस्तक है |
सेवा कार्य क्यों और कैसे Seva karya kyo aur kaise hi
सेवा एक भाव है जो अन्तरात्मा से प्रकट होकर दूसरों के कष्टों का निवारण करता है। …
ख़िलाफ़त आंदोलन Khilafat andolan
ख़िलाफ़त आंदोलन (1919-1924) भारत के मुस्लिमों के बीच ओटोमन तुर्की साम्राज्य के पतन और प्रथम विश्व …
मैक्समूलर द्वारा वेदो का विकृतिकरण Maxmuller dwara vedo ka vikruti
मैक्समूलर द्वारा वेदो का विकृतिकरण Maxmuller dwara vedo ka vikruti
अंग्रेज शासक लगातार यही प्रचार करते रहे कि मैक्समूलर तो वेदों का महान विद्वान और हिन्दू …
महान भारतीय वैज्ञानिक Mahan Bharatiya Vygnanik
महान भारतीय वैज्ञानिक Mahan Bharatiya Vygnanik
जहाँ एक ओर ऋषिमुनियों व तपस्वियों ने ज्ञान व अध्यात्म की ज्योति प्रज्जवलित की, वहीं इस …
