भारत में शिक्षा की राजनीति Bharat mein shiksha ke rajneeti

दुर्भाग्यवश स्वातंत्र्योत्तर काल में कुछ एक अपवाद छोड़कर अंग्रेजों की मूल शिक्षा नीति में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। आज भी हिंदुस्थान की अस्मिता और सांस्कृतिक राष्ट्रीयता को हानि पहुँचानेवाली शिक्षा नीति कार्यान्वित है ।
इसी संदर्भ में इस प्रबंध में ऊहापोह किया गया

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प्राचीन काल में हिंदुस्थान में शिक्षा की राजनीतिका मुख्य सूत्र सांस्कृतिक संघर्ष का रहा है। विदेशी मुसलमानों के शासन काल में हिंदू अपनी स्वत्त्व रक्षा हेतु प्रयत्नशील थे तो मुसलमान शासक स्वत्त्व हरण का हिंदुत्व पर आघात करने का प्रयत्न कर रहे थें ।
हिंदुस्थान में ब्रिटिशों का शासन स्थापित होनेपर उन्होंने पूरे देश का पश्चिमीकरण तथा ईसाईकरण करने का प्रस्ताव ब्रिटिश पार्लमेंट में पारित किया। उसके अनुसार शिक्षा के माध्यम से हिंदुस्थान की अस्मिता और सांस्कृतिक राष्ट्रीयता नष्ट करने का नियोजनपूर्वक प्रयत्न किया ।
दुर्भाग्यवश स्वातंत्र्योत्तर काल में कुछ एक अपवाद छोड़कर अंग्रेजों की मूल शिक्षा नीति में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। आज भी हिंदुस्थान की अस्मिता और सांस्कृतिक राष्ट्रीयता को हानि पहुँचानेवाली शिक्षा नीति कार्यान्वित है ।
इसी संदर्भ में इस प्रबंध में ऊहापोह किया गया .
Godavari Publications ; Pages  :151; ; Paperback ;

Author

Prabhakar Mande

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