100 वर्ष संकल्प यात्रा – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 varsh sankalp yatra – Rashtriya Swayamsevak Sangh
100 वर्ष संकल्प यात्रा – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 varsh sankalp yatra – Rashtriya Swayamsevak Sangh
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश का यह पल नि:संदेह, देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज, देश के हर राष्ट्रनिष्ठ नागरिक को गौरव का भान कराने वाला है। 1925 में विजयादशमी के दिन डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा रोपा गया संघ बीज आज विशाल वटवृक्ष बना है तो इसके पीछे अनगिनत स्वयंसेवकों का तप ही है।
यह पुस्तक पठनीय ही नहीं, संग्रहणीय भी है। मात्र 200 पृष्ठों में इसमें गागर में सागर भरने का प्रयास किया गया है। सुधी पाठकों और संघ के बारे में जानने के इच्छुक लोगों को पुस्तक रुचिकर लगेगी, ऐसी आशा है
विभाजन विभीषिका जो बताना जरूरी है
This is the Hindi translation of the book, Now It Can Be Told by Prof AN Bali
बांग्लादेश की मानव त्रासदी 1971 Bangladesh ki maanav traasdi 1971
बांग्लादेश की मानव त्रासदी 1971 Bangladesh ki maanav traasdi 1971
1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में हिंदुओं को छाँट कर अलग किया गया ताकि उनका कत्ल …
खजाने की शोधयात्रा – Khazane Ki Shodhyatra
खजाने की शोधयात्रा – Khazane Ki Shodhyatra
लगभग आठ सौ/नौ सौ वर्ष पहले तक अपना भारत विश्व का सबसे समृद्ध, संपन्न और ज्ञानवान देश था। विश्व का एक-तिहाई से ज्यादा जी.डी.पी. भारत का था।
‘खजाने की शोधयात्रा’ में इन अनछुई बातों को आपके सामने लाया है, इस लोकप्रिय पुस्तक ‘भारतीय ज्ञान का खजाना’ के लेखक प्रशांत पोळ ने, अत्यंत रोचक शैली में !”
राष्ट्रध्वज और आरएसएस – RashtraDhwaj aur RSS
राष्ट्रध्वज के विकास की यात्रा,भगवा ध्वज, तिरंगा और संघ के अंतर्संबंधों का विश्लेषण !
साक्षात्कार@संघ शताब्दी Saakshaatkar – Sangh Shatabdi
स्वयंसेवक का अर्थ ही स्वयं से प्रारम्भ करने वाला, यह है। संघ का घटक शब्द का अर्थ है ‘जैसा मैं हूँ, वैसा संघ है और जैसा संघ है, वैसा मै हूँ। जैसे समुद्र की हर बूंद समुद्र जैसी है और सब बूंदों से मिलकर ही समुद्र बनता है। यह ‘एक’ और ‘पूर्ण’ का सबंध संघ में प्रारम्भ से ही चल रहा है। स्वयंसेवक का आत्मचिंतन सतत चलता है।
Bharatiya Jeevan Shaili – भारतीय जीवन शैली
Bharatiya Jeevan Shaili – भारतीय जीवन शैली
जीवन स्वस्थ रहा तो सब कुछ अच्छा रहता है। स्वास्थ्य का सम्बन्ध शारीरिक व मानसिक दोनों से ही है!
सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय हिन्दुत्व एक जीवन-पद्धति – Hindutva-Nyayalaya
माननीय न्यायाधीशों ने माना है कि हिन्दुत्व भारतीयता का ही पर्यायवाची है, क्योंकि ‘हिन्दू’ शब्द विदेशियों …
हिन्दवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी-Hindvi Swaraj Ke Sansthapak Chhatrapati Shivaji
हिन्दवी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी-Hindvi Swaraj Ke Sansthapak Chhatrapati Shivaji
Publisher : Suruchi ; Paperback ; Pages : 188 ; Author : Om Prakash Singh
अपनों के अपने जगदेव राम Apno ke apne jagdev ram
अपनों के अपने जगदेव राम Apno ke apne jagdev ram
श्री जगदेव रामजी इतने निर्मल बाल मन के थे कि बच्चों में बच्चों जैसा, युवक प्रौढ़ों …
सुंदर मेरा घर – Sundar Mera Ghar
परिवारों को सुंदर, सुदृढ़,संस्कारयुक्त एवम् समस्यामुक्त बनाने के लिये सरल सूत्र Publisher : Kalpataru ; Paperback …
भारत विभाजन के कुछ अज्ञात तथ्य – Bharat Vibhajan Ke Kuch Agyath Tathya
विभाजन पर प्रकाशित अब तक की सभी पुस्तकों से यह पुस्तक अलग प्रकार की है। बाकी सभी पुस्तकें गांधी, नेहरू, पटेल, जिन्ना और माउंटबेटन के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं। किंतु यह पुस्तक आम व्यक्तियों, परिवारों, गलियों, मुहल्लों, बाजारों, गांवों व नगरों में घूमती है और इस कारण जगह-जगह घटी उन दिनों की घटनाओं का जमीनी स्तर पर वर्णन करती है। यह वर्णन उन लोगों के द्वारा है, जिन्होंने यह सब स्वयं देखा और भोगा था।
सांस्कृतिक अस्मिता की प्रतीक गोमाता Sanskritik Asmit ki prateek gomata
इस पुस्तक के विद्वान लेखक ने एक विस्तृत ऐतिहासिक परिदृश्य प्रस्तुत किया है कि हिन्दू समाज ने किस प्रकार ब्रिटिश शासनकाल में गोरक्षा का बृहद् प्रयास किया था, और किस प्रकार उसे विफल किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि ब्रिटिश शासक गोरक्षा के प्रश्न को भारत की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा हुआ मानते थे और आशंकित थे कि गोरक्षा का अभियान यदि प्रबल हुआ तो उनका साम्राज्य संकटापन्न हो जाएगा।
विमर्श भारत का Vimarsh Bharat ka
विमर्श भारत का Vimarsh Bharat ka
चार वर्षों (2020-21-22-23) में विमर्श के मंच को देश के जाने-माने वक्ताओं ने अपने अनमोल विचारों से समृद्ध किया है। यह पुस्तक उनके विचारों को सार रूप में आप तक पहुंचाने का विनम्र प्रयास है।
छत्रपति शिवाजी महाराज न होते तो Chhatrapati Shivaji Maharaj na hote tho
वरिष्ठ ऐतिहासिक शोधकर्ता श्री. यह गजानन भास्कर मेहेंदले द्वारा लिखित एक बहुत ही महत्वपूर्ण पुस्तक है जो भारत के मध्यकालीन इतिहास के बारे में कई मान्यताओं को चुनौती देती है।
हिन्दू और हिन्दू धर्म शब्दों के अर्थ और छल Hindu aur Hindu Dharm Shabdon ke arth aur chhal
Author : Sitaram Goel ;Paperback ; Publisher : VOI Aditya Prakashan ;Pages : 48
प्रयागराज कुंभ कथा Prayagraaj Kumbh Katha
प्रयागराज कुंभ कथा Prayagraaj Kumbh Katha
प्रस्तुत पुस्तक ‘प्रयागराज-कुंभ-कथा’ एक ऐसी दिग्दर्शिका है, जिसमें प्रयागराज की गौरव-गाथा का मात्र स्मरण किया गया है।
सचित्र रामायण – Sachitra Ramayan Hindi
सचित्र रामायण – Sachitra Ramayan Hindi
सम्पूर्ण रामायण को समग्र रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास 125 चित्रणों में से. कार्य …
वोक़िज़्म का मायाजाल:कुटुंब शक्ति संजीवनी-Wokism Ka Mayajaal : Kutumb Shakti Sanjivn
– यह पुस्तक अभिभावकों, सांस्कृतिक विचारकों और आधुनिक वैचारिक चुनौतियों को समझने वालों के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है।
भारत में विज्ञान की उज्ज्वल परंपरा – Bharat Me Vignan Ki Ujwal Parampara
भारत में विज्ञान की उज्ज्वल परंपरा – Bharat Me Vignan Ki Ujwal Parampara
अभी तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिमी वैज्ञानिक पश्चिमी देशों को ही विज्ञान का …
पञ्च परिवर्तन – Panch Parivartan
अपने दैनिक जीवन में सामाजिक समरसता, कुटुंब भाव, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, स्वदेशी का आग्रह और नागरिक कर्तव्य बोध का पालन करें।
बनाएँ जीवन प्राणवान banayen jeevan praanvaan
इस पुस्तक में चराचर जगत में व्याप्त प्राण का अनुभव प्रत्यक्ष प्राप्त करने हेतु प्रैक्टिकल टिप्स प्रदान किए गये हैं। सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास हेतु इनका लाभ प्रत्येक व्यक्ति ने अवश्य लेना चाहिए।
भीम-मीम गठजोड़: कथ्य और तथ्य Bhim- MIM gathjod
भीम-मीम गठजोड़: कथ्य और तथ्य Bhim- MIM gathjod
भारत में जाति व्यवस्था के नाम पर ऊच नीच का भेद दिखाकर ही अनुचित वर्ग के विरुद्ध इस तरह के षड्यन्त्रौं को मुर्त रूप दिया जाता है। पुस्तक में जातियो की व्यवस्था को शास्त्रीय और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर विवेचित किया गया है।
