विषैला वामपंथ Vishaila Vampanth

डॉ राजीव ने सही लिखा है कि ‘विषैला वामपंथ’ कहीं से भी विद्वत्ता से भरा  नहीं है लिहाजा, आम आदमी को वामपंथ और वामपंथी कया होते हैं, यह  बिलकुल आम आदमी की बोल चाल की भाषा में ही समझाया हे उन्होंने लेकिन फिर भी, लेखक की मेहनत दिख जाती है, जिस तरह की जानकारी जुटाकर उन्होंने इतने सरल तरीके से पेश किया है, आम आदमी शायद न समझे  लेकिन पत्रकारिता में जिसके बाल सफेद हुए हैं, ऐसे मेरे जेसे अनुभवी पत्रकार के लिए तो यह सरल सी भाषा में लिखी गयी पुस्तक एक दस्तावेज से कम नहीं।

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डॉ राजीव ने सही लिखा है कि ‘विषैला वामपंथ’ कहीं से भी विद्वत्ता से भरा  नहीं है लिहाजा, आम आदमी को वामपंथ और वामपंथी कया होते हैं, यह  बिलकुल आम आदमी की बोल चाल की भाषा में ही समझाया हे उन्होंने लेकिन फिर भी, लेखक की मेहनत दिख जाती है, जिस तरह की जानकारी जुटाकर उन्होंने इतने सरल तरीके से पेश किया है, आम आदमी शायद न समझे  लेकिन पत्रकारिता में जिसके बाल सफेद हुए हैं, ऐसे मेरे जेसे अनुभवी पत्रकार के लिए तो यह सरल सी भाषा में लिखी गयी पुस्तक एक दस्तावेज से कम नहीं।

Paperback ; Author : Dr Rajiv Mishra ; Pages : 200

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Dr Rajiv Mishra

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