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100 वर्ष संकल्प यात्रा – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 varsh sankalp yatra – Rashtriya Swayamsevak Sangh

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश का यह पल नि:संदेह, देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज, देश के हर राष्ट्रनिष्ठ नागरिक को गौरव का भान कराने वाला है। 1925 में विजयादशमी के दिन डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा रोपा गया संघ बीज आज विशाल वटवृक्ष बना है तो इसके पीछे अनगिनत स्वयंसेवकों का तप ही है।

यह पुस्तक पठनीय ही नहीं, संग्रहणीय भी है। मात्र 200 पृष्ठों में इसमें गागर में सागर भरने का प्रयास किया गया है। सुधी पाठकों और संघ के बारे में जानने के इच्छुक लोगों को पुस्तक रुचिकर लगेगी, ऐसी आशा है

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‘संकल्प यात्रा’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश का यह पल नि:संदेह, देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज, देश के हर राष्ट्रनिष्ठ नागरिक को गौरव का भान कराने वाला है। 1925 में विजयादशमी के दिन डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा रोपा गया संघ बीज आज विशाल वटवृक्ष बना है तो इसके पीछे अनगिनत स्वयंसेवकों का तप ही है। और जैसा संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, इसके पीछे समाज का संबल रहा कि संघ उत्तरोत्तर बढ़ता गया और आज इसका व्याप देश में सर्वदूर ही नहीं, विदेशों में भी अच्छे परिमाण में दिखता है।

इस क्षण के यशोगान और हिन्दू समाज के शौर्य जागरण के संकल्प से आरम्भ हुई इस संघ यात्रा के विभिन्न पड़ावों; संघर्ष और चुनौतियों के क्षणों; आनंद, अभियानों—आंदोलनों की सफलता के जयनाद; स्वयंसेवकों द्वारा प्राणपण से किए कार्य विस्तार के प्रयासों और देश के स्व जागरण हेतु अपनाए गए कार्यक्रमों का पुन: स्मरण कराती पुस्तक ‘संकल्प यात्रा’ का प्रकाशन वास्तव में एक अनूठा प्रयास है।

भारत प्रकाशन दिल्ली लिमिटेड के साप्ताहिक पांचजन्य की यह प्रस्तुति सुयोग्य संपादक श्री हितेश शंकर के मार्गदर्शन में प्रकाशित हुई है। इसमें संघ शताब्दी पर सरसंघचालक और सरकार्यवाह के साक्षात्कारों के साथ ही, अनेक वरिष्ठ अधिकारियों, कार्यकर्ताओं, हितचिंतकों के विशद् आलेखों से संगठन के विभिन्न आयामों, आनुषांगिक संगठनों के कार्यों, स्वयंसेवकों के सेवा भाव आदि की एक झलक दिखाने का प्रयास किया गया है। संघ से इतर अन्य अनेक विभूतियों, जैसे राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति के.टी. थॉमस, डॉ. डेविड फ्रॉली आदि ने भी संघ के प्रति अपने निश्छल मनोभावों को सुंदर शब्दों में व्यक्त किया है।

यह पुस्तक पठनीय ही नहीं, संग्रहणीय भी है। मात्र 200 पृष्ठों में इसमें गागर में सागर भरने का प्रयास किया गया है। सुधी पाठकों और संघ के बारे में जानने के इच्छुक लोगों को पुस्तक रुचिकर लगेगी, ऐसी आशा है

Publisher : BPDL ; Paperback ; Pages : 236 ; Author : Hitesh Shankar

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Hitesh Shankar

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