सांस्कृतिक अस्मिता की प्रतीक गोमाता Sanskritik Asmit ki prateek gomata

इस पुस्तक के विद्वान लेखक ने एक विस्तृत ऐतिहासिक परिदृश्य प्रस्तुत किया है कि हिन्दू समाज ने किस प्रकार ब्रिटिश शासनकाल में गोरक्षा का बृहद् प्रयास किया था, और किस प्रकार उसे विफल किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि ब्रिटिश शासक गोरक्षा के प्रश्न को भारत की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा हुआ मानते थे और आशंकित थे कि गोरक्षा का अभियान यदि प्रबल हुआ तो उनका साम्राज्य संकटापन्न हो जाएगा।

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इस पुस्तक के विद्वान लेखक ने एक विस्तृत ऐतिहासिक परिदृश्य प्रस्तुत किया है कि हिन्दू समाज ने किस प्रकार ब्रिटिश शासनकाल में गोरक्षा का बृहद् प्रयास किया था, और किस प्रकार उसे विफल किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि ब्रिटिश शासक गोरक्षा के प्रश्न को भारत की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा हुआ मानते थे और आशंकित थे कि गोरक्षा का अभियान यदि प्रबल हुआ तो उनका साम्राज्य संकटापन्न हो जाएगा।

इस के पूर्व मध्यकाल में मुस्लिम आक्रान्ता और शासक भी गोरक्षा को हिन्दू संस्कृति का प्रतीक मान कर व्यापक गोवध करते रहे। वे हिन्दुओं को अपमानित करने के लिए विविध प्रकार से और विविध अवसरों पर गोवध करते थे। वह कहानी भी विद्वानों द्वारा गवेषणा का विषय है।

Publisher : Aditya Prakashan ; Author : Rameshwar Mishr Pankaj ; Paperback ; Pages : 238

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