साक्षात्कार@संघ शताब्दी Saakshaatkar – Sangh Shatabdi

स्वयंसेवक का अर्थ ही स्वयं से प्रारम्भ करने वाला, यह है। संघ का घटक शब्द का अर्थ है ‘जैसा मैं हूँ, वैसा संघ है और जैसा संघ है, वैसा मै हूँ। जैसे समुद्र की हर बूंद समुद्र जैसी है और सब बूंदों से मिलकर ही समुद्र बनता है। यह ‘एक’ और ‘पूर्ण’ का सबंध संघ में प्रारम्भ से ही चल रहा है। स्वयंसेवक का आत्मचिंतन सतत चलता है।

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स्वयंसेवक का अर्थ ही स्वयं से प्रारम्भ करने वाला, यह है। संघ का घटक शब्द का अर्थ है ‘जैसा मैं हूँ, वैसा संघ है और जैसा संघ है, वैसा मै हूँ। जैसे समुद्र की हर बूंद समुद्र जैसी है और सब बूंदों से मिलकर ही समुद्र बनता है। यह ‘एक’ और ‘पूर्ण’ का सबंध संघ में प्रारम्भ से ही चल रहा है। स्वयंसेवक का आत्मचिंतन सतत चलता है।

Publisher : Vimarsh Prakashan ; Paperback ; Pages : 32 ; Author : Dr Mohan Bhagwat

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Mohan Bhagwat

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