Description
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् य अर्थात् शरीर ही सभी धर्मो (कर्तव्यों) को पूरा करने का साधन है।
भारत के प्राचीन ऋषि मनीषियों ने लम्बी साधना एवं गहन अध्ययन के द्वारा शरीर को स्वस्थ एवं दीर्घायु रखने के लिये विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों को विकसित किया। उनमें से “मुद्रा विज्ञान” एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमें हाथों की अंगुलियों व अँगूठे के उपयोग के द्वारा ही चिकित्सा का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
Author : Shrivardhan ; Paperback ; Pages : 45


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