Description
त्रेतायुग के राम की कथा हजारों या संभवत: लाखों बार लिखी गई है, लेकिन इतने युगों के बाद भी इसका भावपक्ष हमें विहवल कर देता है। संभवत: इसीलिए राम सबके होकर भी कंदर्प अगणित हो गए। सबने उन्हें अपनी दृष्टि से देखा । इसी कारण बहुत सारे क्षेपक भी जुड़ते चले गए। लेकिन वाल्मीकि रामायण आज भी सबसे प्रामाणिक और तथ्यपूर्ण ग्रंथ है। यह पुस्तक उसी ग्रंथ के कुछ मोतियों को सुरुचिपूर्ण ढंग से कथारूप में पिरोकर प्रकट करती है। इस पुस्तक की भाषा संगीत की तरह लयबद्ध है जिसमें पाठक डूब सा जाता है।
Publisher : Malathi Prakashan ; PaperBack ; Pages : 214 ; Author : Devanshu Kumar Jha Padmanabh


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