Description
दार्शनिक दृष्टि से अध्यात्म सदैव एक उच्चतर भाव है जिस में कोई नकारात्मक पक्ष नहीं होता। किंतु उस की आड़ में जब भिन्न मतावलबियों पर वैचारिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक प्रहार तक होते हैं, तब उसे आक्रमण कहना सर्वथा उपयुक्त है। यह संज्ञा ‘आध्यात्मिक आक्रमण’, चीनी कम्युनिस्ट नेता माओ त्से तुंग ने ईसाई मिशनरियों के कार्यों को दी थी। वही कार्य भारत में किन-किन रूपों में होते रहे हैं, और इस के क्या अनिवार्य निष्कर्ष निकलते हैं, इसी विषय पर यह पुस्तक केंद्रित है।
अतएव, यह न केवल भारतीय राजनीति के एक दबे-छिपे विषय को प्रमाणिकता के साथ सामने लाने का प्रयत्न है, बल्कि सांप्रदायिकता की समस्या के मूल पक्ष को भी उजागर करता है। न्याय की भावना केवल आर्थिक और राजनैतिक ही नहीं, अपितु सांस्कृतिक क्षेत्र में भी उतनी ही तीव्रता से महसूस की जाती है। अतः सांस्कृतिक न्याय का प्रश्न भी उतनी ही गंभीरता से विचारणीय है, यह पुस्तक इसे भी रेखांकित करती है।
Publisher : Akshaya Prakashan ; Paperback ; Pages : 212 ; Author : Shankar Sharan

