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मैं आतिरा (मतांतरण से वापसी: आतिरा से आइशा और फिर आतिरा)

यह पुस्तक मत-परिवर्तन के शिकार हुए लोगों के लिए है, और उनके लिए भी जो धर्म छोड़ने के कगार पर हैं। इस को धैर्यपूर्वक पढ़ने से निश्चित रूप से आप अपने मतांतरण के निर्णय पर पुनर्विचार करोगे।

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Description

यह पुस्तक उन लोगों को पुनर्वासित करने का मार्गदर्शन प्रदान करती है, जो कट्टरवादी विचारधाराओं के प्रभाव में आकर तर्कसंगत और आलोचनात्मक विश्लेषण की क्षमता खो चुके हैं। इनको आवश्यकता है आध्यात्मिक काउंसेलिङ् की। इस में ऐसे काउंसेलिङ् के लिए आवश्यक सभी तथ्य हैं जिन्हें सरल और व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

आतिरा अपने व्यक्तिगत अनुभव प्रस्तुत करती हैं, जिसमें वे बताती हैं कि कैसे कट्टरवादी समूह, युवाओं को मतांतरण के लिए प्रभावित करते हैं। वे पहले व्यक्ति में अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति अरुचि पैदा करते हैं। फिर उसके बाद समाज, देश, परिवार और अंततः उसकी अपनी पहचान के प्रति भी उनमें द्वेष की भावना जगाते हैं।

यह पुस्तक मत-परिवर्तन के शिकार हुए लोगों के लिए है, और उनके लिए भी जो धर्म छोड़ने के कगार पर हैं। इस को धैर्यपूर्वक पढ़ने से निश्चित रूप से आप अपने मतांतरण के निर्णय पर पुनर्विचार करोगे।

Publisher : Arsha Vaidya Samajam ; Paperback ; Author : Athira ; Pages : 376

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