100 वर्ष संकल्प यात्रा – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 varsh sankalp yatra – Rashtriya Swayamsevak Sangh
100 वर्ष संकल्प यात्रा – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 varsh sankalp yatra – Rashtriya Swayamsevak Sangh
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश का यह पल नि:संदेह, देश के बहुसंख्यक हिन्दू समाज, देश के हर राष्ट्रनिष्ठ नागरिक को गौरव का भान कराने वाला है। 1925 में विजयादशमी के दिन डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा रोपा गया संघ बीज आज विशाल वटवृक्ष बना है तो इसके पीछे अनगिनत स्वयंसेवकों का तप ही है।
यह पुस्तक पठनीय ही नहीं, संग्रहणीय भी है। मात्र 200 पृष्ठों में इसमें गागर में सागर भरने का प्रयास किया गया है। सुधी पाठकों और संघ के बारे में जानने के इच्छुक लोगों को पुस्तक रुचिकर लगेगी, ऐसी आशा है
स्वतंत्रता के सोपान swatantrata ke sopaan
स्वतंत्रता के सोपान swatantrata ke sopaan
माँ भारती के लिए हजारों-लाखों सपूतों का जीवन होम हो जाता है। आध्यात्मिक, राजनीतिक, समाज को संगठित करने वाले, सुधारने वाले आंदोलन और इनके अग्रणी व्यक्ति अलग-अलग हैं परंतु सबकी अलख, सब आवाज, सबका लक्ष्य, सबकी निष्ठा एक ही है, उस ‘स्व’ की प्राप्ति ! उस की पुनर्प्रतिष्ठापना ! हर प्रयास, हर उत्सर्ग में यह चाह हर बार दिखाई देती है।
विभाजन : टीस और सीख Vibhajan tees aur seekh
विभाजन : टीस और सीख Vibhajan tees aur seekh
भारत विभाजन की गाथा की तरह यह पुस्तक भी क्रमिक ढंग से ही आकार लेती गई। भारत विभाजन की गाथा के कई आयाम हैं- असंख्य जीवन की हानि, भूगोल की हानि, संस्कृति की हानि, जातिगत विनाश, राजनीतिक पक्ष और सबसे बढ़कर उसे ढाँपने- छिपाने और यहां तक कि उचित ठहराने के प्रयास त्रासदी बहुआयामी है और पीड़ा को देखने, समझने, बताने के भी अनेक आयाम हो सकते हैं। यह पुस्तक यथा शक्ति आयामों को देखती, परखती और इन्हें गूंथते हुए आगे बढ़ती है।
