Description
देश के इतिहास में पहली बार सेना के एक अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को जब सितंबर 2008 के मालेगांव बम विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया तो सभी अखबारों की सुर्खियां जैसे चीख-चीख कर बता रही थीं—“यह हिंदू आतंकवाद है।”
यह शख्स आखिर कौन था, सभी अखबारों के पहले पन्ने पर उसकी तस्वीरें क्यों छाप दी गई थीं? उसे ही निशाना क्यों बनाया गया? क्या वह सचमुच दोषी था? क्या उसे फंसाया गया था? क्या उसे बलि का बकरा बनाया गया था? विचाराधीन कैदी के तौर पर नौ वर्षों तक जेल की कोठरी में पड़े रहने पर मजबूर सेना के इस प्रतिष्ठित अधिकारी के परिवार का क्या हुआ और उसे किन-किन मुसीबतों का सामना करना पड़ा? इस पुस्तक में इन सभी सवालों का जवाब देने का प्रयास किया गया है और इस कोशिश में एक ऐसी साजिश का पता चलता है जिसे जानकर इंसान की रूह भी कांप जाए।
ISBN : 978-8119670970; Pages : 176 ; Vitasta Publishing ; Hindi ; Author : Smita Mishra
लेखिका परिचय :
हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं पर समान अधिकार रखने वाली एक सम्मानित पत्रकार स्मिता मिश्रा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 25 वर्षों से ज्यादा समय तक काम कर चुकी हैं। वे देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद, राजनीति और सम-सामयिक मामलों पर रिपोर्टिंग करती रही हैं। अपनी रिपोर्टिंग के सिलसिले में वे देश के कोने-कोने में भ्रमण कर चुकी हैं और उन्हें कई क्षेत्रीय भाषाओं का भी ज्ञान है। इस समय प्रसार भारती में एक सलाहकार के तौर पर काम कर रही स्मिता मिश्रा मूलतः बिहार की रहने वाली हैं। जम्मू-कश्मीर में एक स्थानीय अखबार से पत्रकारिता का अपना सफर शुरू करने के बाद वे देश की राजधानी में आ गईं और उन्होंने अमर उजाला, ईटीवी, एचटी ग्रुप, दैनिक भास्कर और दि फ्री प्रेस जनरल जैसे अनेक पत्र-पत्रिकाओं के साथ काम करने का अनुभव प्राप्त किया।


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