गौ विज्ञान पुस्तिका Gau Vigyan Pustika

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चलता फिरता औषधालय है गाय

भारतीय नस्ल की देसी गाय ही पूरे ब्रह्माण्ड में एक ऐसा प्राणी है, जिसके मल-मूत्र में औषधीय गुण है और जिसके बिना मनुष्य जीवन के सोलह संस्कार या कोई धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होते हैं। गोबर-गौमूत्र से जैविक खाद द्वारा उत्पन्न अन्न, फल, सब्जी आदि के गुणों की व्याख्या नहीं की जा सकती है। गाय के गोबर में लक्ष्मी जी का एवं गौमूत्र में गंगाजी का निवास माना गया है। गोबर जबरदस्त एंटीसेप्टिक होता है, इसलिए गोबर से लिपे-पुते घरों में प्लेग, हैजा आदि भयंकर बीमारी नहीं होती, रेडियेशन का प्रभाव नहीं होता, गोबर में जहर खींचने की विशेष शक्ति होती है। गोबर से गैस पैदा की जाती है, इससे बिजली भी पैदा की जा सकती है।

भारतीय गौवंश के मूत्र और गोबर से 32 प्रकार की औषधियों का निर्माण हो रहा है, जो कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि सरकारों से मान्यता प्राप्त है। अमेरिका में गौमूत्र पर पेटेंट कराये गये “फार्मास्यूटिकल कम्पोजीशन कंटेनिंग काऊ यूरिन डिस्टीलेट एण्ड ऐंटीबायोटिक ” शोध का उपयोग कैंसर रोग के इलाज पर किया जा रहा है।

Publisher : Suruchi ; PaperBack ; Pages : 52

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