संत रविदास – Sant Ravidas

यद्यपि हिन्दू समाज गतिमान समाज रहा है परन्तु समय-समय पर वैचारिक संकीर्णताओं, शास्त्रों की उचित व्याख्या का अभाव, कुछ व्यवस्थाओं का कालवाह्य हो जाना तथा परकीय पराधीनता के कारण कुछ सामाजिक दोष भी उत्पन्न हुए हैं। अस्पृश्यता ऐसी ही एक विकृति है जिसका शास्त्रीय आधार नहीं है। यह हमारे समाज में गहराई से वर्षों से जड़ें जमा चुकी है। भारतीय संतों, समाज सुधारकों, कवियों ने इस विकृति के विरूद्ध सतत संघर्ष किया!

संत रविदास भी इन्हीं संतो, महापुरुषों की मालिका के एक सुवासित पुष्प हैं।

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हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास हजारों वर्षों का इतिहास संस्कृति और मानव सभ्यता की विरासत है ! यद्यपि हिन्दू समाज गतिमान समाज रहा है परन्तु समय-समय पर वैचारिक संकीर्णताओं, शास्त्रों की उचित व्याख्या का अभाव, कुछ व्यवस्थाओं का कालवाह्य हो जाना तथा परकीय पराधीनता के कारण कुछ सामाजिक दोष भी उत्पन्न हुए हैं। अस्पृश्यता ऐसी ही एक विकृति है जिसका शास्त्रीय आधार नहीं है। यह हमारे समाज में गहराई से वर्षों से जड़ें जमा चुकी है। भारतीय संतों, समाज सुधारकों, कवियों ने इस विकृति के विरूद्ध सतत संघर्ष किया।

महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर गुरुनानकदेव, आद्य शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, रामानन्द, कबीरदास, नारायण गुरु, ज्योतिवा फुले आदि अनेक महापुरुषों, संतों ने इस अभिशाप, कुरीति को मिटाने के लिये प्रयास किये। संत रविदास भी इन्हीं संतो, महापुरुषों की मालिका के एक सुवासित पुष्प हैं।

Publisher : Archana Prakashan ;  Paperback ; Pages : 64 ; Author : Ramnath Neekhra

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