Description
प. पू. श्री गुरुजी सार्वजनिक भाषणों में, संघ-स्वयंसेवकों के सम्मुख बौद्धिकों में, अनेक छोटी-छोटी बोधप्रद कथाओं द्वारा विषय को सरल बनाकर समझाते थे। ये कथाएं कोई उन्होंने गढी थीं, ऐसी बात नहीं। अपने ही प्राचीन ग्रंथों में, साहित्य में आयी हुई इन कथाओं का, सामयिक उपयोग, वे, रोचक ढंग से किया करते थे।
उन्हीं कथाओं का संकलन कर, उन्हें प्रस्तुत करने का यह प्रयास है। कथा- कल्पतरु के रूप में प्रस्तुत हैं।
Author : M.S.Golwalkar Publisher : Shree Bharati Prakashan ; Pages : 142 ; Paperback


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