Description
अंग्रेजी माध्यम का भ्रमजाल पुस्तक ने अपने स्पष्ट विश्लेषण से दिखाया है कि अंग्रेजी माध्यम शिक्षा जन मानस को शिक्षा से काटती है, सृजन शक्ति को घोट देती है, और शायद भारत की पिछड़ेपन का कारण है। यह शिक्षा जो अंग्रेजों ने भारत पर राज करने के लिए बनाई और उससे एक अंग्रेजी वर्गीकृत श्रेणी का निर्माण हुआ जिससे जन मानस कट गया। यह औपनिवेशिकता का एक ऐसा अंश है जिससे भरतीय भाषाएँ ही नहीं बल्कि भारतीय परम्परा और सांस्कृतिक ज्ञान भी समझ से परे हो गए और इन्हें नीचा दिखाया गया। इससे भारतीयों में अंग्रेजों के चले जाने के सत्तर साल बाद आज भी एक हीनता का भाव उत्पन्न होता है।
Publisher : Garuda Prakashan ; PaperBack
Author : Sankrant Sanu ; Pages : 205


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