लोहित के मानसपुत्र : शंकरदेव Lohit ke manasputra Shankardev
लोहित के मानसपुत्र : शंकरदेव Lohit ke manasputra Shankardev
हिन्दी जगत में श्रीमन्त शंकरदेव को परिचित कराने में श्रीसांवरमल सांगानेारिया द्वारा लिखित उपन्यासोसम रोचक, विस्तृत सूचनाओं से समृद्ध यह ग्रन्थ “लोहित के मानसपुत्र : शंकरदेव” महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करने में पूर्णत: सक्षम है। इसके पहले भी असम में ही पले-पढ़े श्रीसांगानेारिया डांगरिया (महोदय) ने पूर्वोत्तर पर साहित्य रचनाएँ कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ अपनी जन्मभूमि असम की कीर्ति को भारतीय जनमानस तक पहुँचाने क स्तुत्य कार्य किया है।
