Description
श्रुति और स्मृति की अवधारणाएँ सनातन धर्म का मूल आधार है। जहाँ श्रुति शाश्वत नियमों का प्रतिपादन करती है, वही स्मृति युग धर्म के अनुरूप बदलते सामाजिक नियमों का विवेचन करती है।
यह पुस्तक–जो एक त्रयी (trilogy) का पहला भाग है- श्रुति तथा वेदों और उपनिषदों से प्राप्त शाश्वत मूल्यों पर चर्चा करती है। यह पवित्र वट (बरगद) वृक्ष के रूपक के माध्यम से भारत की दिव्य जडो की पड़ताल करती है और हिंदू चितन के सर्वश्रेष्ठ पहलुओ को प्रस्तुत करती है, जिसका मूल तत्व सद्भाव, अतर्सबध और परस्पर निर्भरता है।
इसके अतिरिक्त, यह कृति एक हिंदू प्रति आख्यान (counter-narrative) स्थापित करने का एक विनम्र प्रयास है, जो हिंदुओं के अपनी धार्मिक विरासत को एक मुखर एव निस्सकोच स्वदेशी दृष्टिकोण से व्याख्यायित करने के अधिकार की पुष्टि करती है।
Author : A Nagarjun ; Paperback ; Pages : 272

